शुक्र ग्रह का क्या है कनेक्शन – महिलाओं से

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ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि हर व्यक्ति का किसी न किसी ग्रह से संबंध होता है। इसका पता इंसान की जन्म कुंडली से लगाया जा सकता है। आज हम आपको शुक्र ग्रह और महिलाओं से जुड़ी कुछ बातें बताने जा रहे हैं। कुछ विद्वान ज्योतिषियों के अनुसार शुक्र ग्रह को शुभ और रजोगुणी ग्रह माना जाता है। इस ग्रह को जीवन, प्यार, रोमांस और यौन संबंधों का कारक माना जाता है।

लेकिन शुक्र ग्रह का महिलाओं से एक गहरा संबंध होता है, इसके बारे में शायद कोई नहीं जानता हो। कहा जाता है कि किसी भी स्त्री की कुंडली में जैसे वृहस्पति ग्रह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, वैसे ही शुक्र भी दांपत्य जीवन में प्रमुख भूमिका निभाता है। माना जाता है कि अच्छा चेहरा देखने से कुंडली में शुक्र के होने का पता चल जाता है। यह स्त्री के चेहरे को आकर्षण का केंद्र बनाता है। परंतु ज़रूरी नहीं है कि की स्त्री का रंग गोरा है या सांवला। ज्योतिष के अनुसार सुंदर नेत्र और सुंदर केश यानि बालों से पहचाना जा सकता है स्त्री का शुक्र शुभ ग्रहों के सानिध्य में है। जिस किसी स्त्री कुंडली में शुक्र का अच्छा प्रभाव हो तो उसे जीवन में हर सुख सुविधा प्राप्त होती है, जिसमें वाहन, घर, ज्वेलरी, वस्त्र आदि शामिल हैं। किसी भी वर्ग की औरत हो, उच्च, मध्यम या निम्न उसे अच्छा शुक्र सभी वैभव प्रदान करता ही है।

वहीं कुंडली का अच्छा शुक्र स्त्री को गायन, अभिनय, काव्य-लेखन की और प्रेरित करता है। इसके अलावा कहा जाता है कि अगर शुक्र ग्रह चन्द्र के साथ संबंध रखता हो तो ऐसी स्त्री भावुक होती हैं। साथ ही अगर बुध का साथ भी मिल जाए तो स्त्री लेखन के क्षेत्र में पारंगत होती है। मगर ऐसा कहा जा सकता है कि अच्छा शुक्र स्त्री में मोटापा भी देता है। परंतु बता दें कि जहां वृहस्पति स्त्री को थुलथुला मोटापा दे कर अनाकर्षक बनता है वही शुक्र से आने वाला मोटापा स्त्री को और भी सुन्दर दिखाता है।

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अब बता दें कि अगर कुंडली में शुक्र बुरे या पापी ग्रहों का सानिध्य या कुंडली के दूषित भावों के साथ हो तो स्त्री में चारित्रिक दोष भी पैदा कर सकता है। जिसके कारण विवाह में, कष्ट प्रद दांपत्य जीवन, बहु विवाह और तलाक की स्थिति पैदा होने के आसार बढ़ते है। ज्योतिष के अनुसार अगर ऐसा हो तो स्त्री को हीरा पहनने से परहेज़ करना चाहिए। अगर ऐसे हालात में हीरा पहना जाए तो कमज़ोर शुक्र स्त्री में मधुमेह, थाइराईड, यौन रोग, अवसाद और वैभव हीनता लाता है।

इसके अलावा शुक्र को कुंडली में अनुकूल करने के लिए शुक्रवार का व्रत और देवी  लक्ष्मी जी की आराधना करनी चाहिए। छोटी-छोटी कन्याओं को खीर खिलाएं चाहिए। इसके साथ ही कनक–धारा, श्री सूक्त, लक्ष्मी स्त्रोत, लक्ष्मी चालीसा का पाठ और कुछ विशेष लक्ष्मी मन्त्रों का जाप भी शुक्र ग्रह को कुंडली में मज़बूत करता है।

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