कौन है भगवान शिव के गुरू ? नंदी बिना शिव की होती है पूजा कहाँ ?

   देवों के देव कहे जाने वाले भगवान शिव को महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रूद्र, नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है। यह भारतीय धर्म के प्रमुख देवता जाने जाते हैं। ब्रह्मा और विष्णु के त्रिवर्ग में उनकी गणना होती है। पूजा, उपासना में शिव और उनकी शक्ति की ही प्रमुखता है। उन्हें सरलता की मूर्ति माना जाता है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों के नाम से उनके विशालकाल तीर्थ स्वरूप देवालय भी हैं। शिव का वाहन वृषभ है जो शक्ति का पुंज भी है, सौम्य-सात्त्विक भी। ऐसी ही आत्माएँ शिवतत्त्व से लदी रहती और नंदी जैसा श्रेय पाती हैं। शिव का परिवार भूत-पलीत जैसे अनगढ़ों का परिवार है।
इसी क्रम में हम आपको बताने जा रहें है कि कहाँ है शिव का ऐसा अनूठा मंदिर जहाँ शिव के सनमुखं उनके वाहन नंदी नहीं है। उनके अभाव में हमेशा से ही शिव की पूजा होती आ रही है। ऐसा मंदिर है नाशिक शहर के प्रशिद्ध पंचवटी स्थल में गोदावरी तट के पास। यह एक ऐसा शिव मंदिर है, जिसमें नंदी नही है। अपनी तरह का यह अकेला शिव मंदिर है। यह मंदिर ‘‘कपालेश्वर मंदिर’’ के नाम से जग विख्यात हैं। पुराणों में कहा गया है कि श्री कपालेश्वर महादेव नामक इस स्थल पर किसी समय में भगवान शिव ने यहाँ वास किया था। यहाँ नंदी की अभाव की कहानी भी बड़ी रोचक है।
यह उस समय की बात है। जब ब्रह्म देव के पांच मुंख थे। चार मुंख वेद उचारण किया करते थे और पांचवा मुंख निंदा किया करता था। इस निंदा से संतप्त शिव ने इस मुख को काट दिया। इस घटना के कारण शिव को ब्रह्म-हत्या का पाप लग गया। उस पाप से मुक्ति पाने के लिए शिव ने हर जगह भटके लेकिन उन्हें मुक्ति नहीं मिला। एक दिन जब वे ‘‘शोमेश्वर’’ में बैठें हुऐ थे। तब एक बछणे द्वारा उन्हें मुक्ति का उपाय बताया गया। कथा में बताया गया वो बछणा नंदी ही था। वे शिव जी के साथ गोदावरी रामपूण तट गया और रामकुंड में स्नान करने को कहा। स्नान के बाद शिव जी ब्रह्म-हत्या के पाप से मुक्त हो सके। नंदी के कारण शिव जी ब्रह्म-हत्या से मुक्त हुऐ थे। इस लिए उन्होंने नंदी को गुरू माना और अपने सामने बैँने को मना किया और यही वजह है कि कपालेश्वर मंदिर के बाहर नंदी की कोई मूर्ति नहीं है।

कुछ समय पूर्व यह कपालेश्वर मंदिर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था। मंदिर की परंपरा के अनुसार यहाँ महिलायें मंदिर के ‘गर्भ गृह’ में प्रवेश नही कर सकती है। इसी प्रथा के विरूद्ध कुछ हिंदू मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को हटाने के लिए मुहिम चलाने वाली ऐसी ही एक समीति की अध्यक्ष ने यहां प्रसिद्ध कपालेश्वर मंदिर के बाहर पूजा की लेकिन मंदिर के गर्भगृह में नही जा सकी। मंदिर के ट्रस्ट के सदस्यों और पुलिस अधिकारियों ने उन्हें नियमों तथा परंपराओं के बारे में बताया। वहीं मंदिर में और आसपास की सुरक्षा कड़ी कर दी थी। उन्होंने कड़े पुलिस बंदोबस्त के बीच ‘गर्भ गृह’ के बाहर ही पूजा कर सकी

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