महिलाओं का व्यवहार तय करते हैं ग्रह-नक्षत्र, भविष्य चमकाने के लिए करें उपाय

इसी प्रकार चंद्रमा और शुक्र जहां स्त्री स्वभाव ग्रह हैं वहीं सूर्य, मंगल और गुरु पुरुष ग्रह हैं। स्त्री जातकों में स्त्री राशि और स्त्री ग्रहों का प्रभाव अधिक होने पर स्त्रैण गुण अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में होंगे। ऐसा देखा गया है कि जिन मामलों में पुरुष जातकों की तुलना में स्त्री जातकों का विश्लेषण किया जाता है, उनमें स्त्री जातकों के लिए अलग नियम दिए गए हैं। शेष योगायोगों के मामले में स्त्री और पुरुष जातकों को कमोबेश एक ही प्रकार से फलादेश दिए जाते हैं। जिस स्त्री की कुंडली में पुरुष राशियों और पुरुष ग्रहों की भूमिका अधिक होती है, उनका जीवन कमोबेश पुरुषों की तरह होता है। भारी आवाज, बड़े डील-डौल, उत्साह के साथ आगे बढ़कर काम करने वाली महिलाओं को देखकर ही समझा जा सकता है कि उनकी कुंडली में पुरुष राशियों और सूर्य, मंगल और गुरु जैसे ग्रहों का प्रभाव अधिक है।  

 बृहस्पति देते हैं सांसारिक सुखपुरुष कुंडली में जहां शुक्र सांसारिकता और दैहिक सुख के लिए देखे जाते हैं वहीं स्त्री जातक के लिए गुरु महत्वपूर्ण है। स्त्री जातक के लिए उसके पति का प्रगति करना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। जिस स्त्री जातक की कुंडली में बृहस्पति शुभ स्थान और शुभ प्रभाव में होते हैं, उसे सामाजिक मान-प्रतिष्ठा और सांसारिक सुख सहजता से मिलते हैं। बृहस्पति खराब होने पर स्त्री जातक को अपमान और उपेक्षा झेलनी पड़ सकती है। ऐसे में अधिकांश स्त्री जातकों को गुरु का रत्न पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है। पुखराज रत्न सोने की अंगूठी में पहनने से गुरु का प्रभाव बढ़ जाता है। जिन जातकों के गुरु मारक या बाधक स्थानाधिपति होता है, उनके अलावा सभी स्त्री जातकों को बेधड़क पुखराज पहनाया जा सकता है।   

मंगल भाते हैं महिलाओं को सामान्य तौर पर ऋतुस्राव के दौरान स्त्रियों के रक्त की हानि होती है। ज्योतिष में इसे मंगल के ह्रास के रूप में देखा जाता है। मंगल के इस नुक्सान की भरपाई के लिए सुहागिनों को लाल बिंदी लगाने, लाल चूडिय़ां पहनने, लाल साड़ी एवं लाल रंग का सिंदूर लगाने की सलाह दी जाती है। मंगल की भूमिका अधिकार एवं तेज के रूप में होती है। लाल रंग को धारण करने से मंगल का तेज महिलाओं को फिर से प्राप्त हो सकता है। हालांकि लोक मान्यता में अधिकांशत: इसे सुहाग से जोड़ा जाता है, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह मंगल के नुक्सान की भरपाई है। सामाजिक मान्यताओं में वैधव्य का दोष स्त्रियों को दिया जाता है। स्त्री मांगलिक हो और पति मांगलिक न हो तो ऐसा माना जाता है कि स्त्री हावी रहेगी और दांपत्य जीवन में तनाव रहेगा।  अगर मंगल और शनि आठवें स्थान पर हों तो उसे चूंदड़ी मंगल कहा जाता है। ऐसी स्थिति में मंगल वैधव्य के योग बनाते हैं। कुंडली मिलान में इसका बहुत ध्यान रखा जाता है। विधुर की तुलना में विधवा को पुरुष प्रधान समाज में अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसे देखते हुए कुंडली मिलान के समय पुरुष की तुलना में स्त्री के मंगल पर अधिक ध्यान दिया जाता है।  

 बुध और शनि की भूमिकाबुध और शनि ग्रहों को नपुंसक ग्रह बताया गया है। पुरुष कुंडली में जहां शनि पीड़ादायी ग्रह है, वहीं स्त्री जातक के लिए बुध पीड़ादायी ग्रह सिद्ध होते हैं। बुध के प्रभाव में एक ही रूटीन में लंबे समय तक बने रहना और एक जैसी क्रियाओं को लगातार दोहराते रहना पुरुष के लिए आसान है, पर स्त्री जातकों के लिए यह पीड़ादायी होता है। ऐसे में महिलाओं को अपनी दिनचर्या, कपड़े, रहने का तौर-तरीका लगातार बदलते रहने की सलाह दी जाती है। इससे उनकी जिंदगी में दुख और तकलीफ का असर कम होता है।  परिधान की बात की जाए तो महिलाओं को परिधानों का रंग भी लगातार बदलना चाहिए। सोमवार को क्रीम, मंगलवार को लाल, बुधवार को हरा, वीरवार को पीला, शुक्रवार को गुलाबी, शनिवार को नीला और रविवार को धूसर या गहरा बैंगनी रंग पहनने की सलाह दी जाती है। यह प्रतिदिन का बदलाव उन्हें सभी ग्रहों के अनुकूल परिणाम दिलाता है।  

 चंद्रमा देता है रचनात्मकताजिस स्त्री जातक की कुंडली में चंद्रमा अच्छी स्थिति में होते हैं, वह हंसमुख और रचनाधर्मी होती हैं। राहू, केतू, बुध और शनि के कारण चंद्रमा पीड़ित हो तो स्त्री कर्कशा, रुदन करने वाली या कलहप्रिय होती है। ऐसी स्त्रियों को रोजना सुबह खाली पेट मिश्री के साथ मक्खन खाने की सलाह दी जाती है।  चंद्रमा पीड़ित होने पर शरीर में खनिज तत्वों और कैल्शियम की कमी हो जाती है। मक्खन में उपलब्ध खनिज तत्व एवं कैल्शियम जातक के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को फिर से दुरुस्त करता है और जातक हंसने-खिलखिलाने लगता है। 

स्त्री और अंग लक्षण स्त्री जातकों के अंग लक्षणों के बारे में अधिकांशत: वैवाहिक संदर्भ ही देखा जाता है। विवाह से संबंधित ग्रंथों में स्त्री के सुलक्षणी होने के कई सूत्र बताए गए हैं। इसके अनुसार भाग्यवान स्त्री के सिर के केश लंबे होने चाहिएं, ललाट चौड़ा एवं उन्नत होना चाहिए। शरीर के अंगों पर बाल कम होने चाहिएं। अधिक बालों वाली महिला जातकों को अपने जीवन में अधिक संघर्ष देखना पड़ता है। सौभाग्यशाली कन्याओं की आंखों के पोरों में लाली होनी चाहिएं। हाथ-पैरों के नाखून कठोर न हों तथा साफ-सुथरे होने चाहिएं, हथेलियां, पैरों के तलवे और एड़ी कठोर नहीं होनी चाहिए। लोकमान्यता में गोरे रंग को तरजीह दी जाती है लेकिन सौभाग्यदायी अंग लक्षणों में लाली को तो महत्वपूर्ण माना गया है लेकिन कहीं त्वचा के रंग का उल्लेख नहीं मिलता। 

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