जानें शिवलिंग पर चढ़ाने से पूर्व बेल पत्र के बारें में आवश्यक बातें….

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भगवान शिव के पूजन मेें अर्पित होने वाले बेल पत्र का विशेष महत्व होता हैं। यह भगवान शिव को अतिप्रिय हैं। मान्यता है कि शिव की उपासना बिना बेलपत्र के पूरी नहीं होती। ये बाते सभी शिव भक्त भलिभांति रूप से जानते हैं। लेकिन इस बारे में बहुत कम लोगों को ही जानकारी होती है कि शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाने के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। आज हम आपको इसी क्रम से जुड़ी कुछ खास बातों से अवगत कराऐंगे।

१.किसी भी माह की अष्टमी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा तिथि और सोमवार को बेल पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। बल्कि एक दिन पूर्व ही तोड़ कर रख लें।

२.बेल पत्र तोड़ने से पूर्व विशेष मंत्र का उच्चारण करने के बाद ही तोड़े-

मंत्र
अमृतोद्धव श्रीवृक्ष महादेवप्रिय: सदा।
गृहामि तव पत्रणि श्पिूजार्थमादरात्।।

३.बेल पत्र में कभी भी कटी, टूटी या कोई छेद न हो।

४.बेल पत्र अर्पण करते समय उसके चिकने भाग की ओर से ही अर्पण करें। इसके साथ जल को भी छोड़ते रहें।

५.बेल पत्र अर्पण से पूर्व यह मंत्र अवश्य उचारण करें-

मंत्र-
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं त्रयायुधम।
त्रिजन्म पापसंहारं मेकबिल्वं शिवार्पणम।।

अर्थात् तीन गुण, तीन नेत्र, त्रिशूल धारण करने वाले और तीन जन्मों के पापों का नाश करने वाले भगवान शिव को मैं बेल पत्र अर्पित करता हूँ।

६.भगवान शिव को तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाने का अधिक जिक्र आता हैं। परन्तु अगर हमें पांच पत्तियों वाला दुर्लभ बेलपत्र मिले और उसे हम शिवलिंग पर अर्पण करे तो उसका हमें विशेष फल मिलता हैं।

७.स्कंदपुराण में कहा गया है कि एक बार देवी पार्वती ने अपनी ललाट से पसीना पोछकर फेंका, जिसकी कुछ बूंदें मंदार पर्वत पर गिरीं, जिससे बेल वृक्ष उत्पन्न हुआ।

८.शिवपुराण में बताया गया है जिस स्थान पर बेलवृक्ष होता है, वे स्थान काशी तीर्थ तुल्य माना गया हैं।

९.बेल का वृक्ष घर में लगाने से घर में हमेशा शुख-समृद्धि रहती हैं। इसका स्थान उत्तर-पश्चिम में हो तो सुख-शांति बढ़ती है और बीच में हो तो जीवन में मधुरता बनी रहती हैं।

१०.शिव पुराण के अनुसार, बेल पत्र के वृक्ष की जड़ में भगवान शिव स्वंय शिवलिंग के रूप मे विराजमान रहते हैं। इसलिए हमें बेल पत्र के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए और साथ में जल चढ़ाना चाहिए। अगर गंगा जल चढ़ाते है तो हमें सभी तीर्थों का पुण्य मिल जाता हैं।

११.बेल वृक्ष की पूजा हेतू रविवार और द्ववादशी तिथि एक साथ हो उस दौरान करने से हमारें सारे पापों का नाश होता हैं और घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती हैंं।

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